आज के समय में वहुत से लोग इंट्राडे ट्रेडिंग करते है और वहुत से लोग इंट्राडे ट्रेडिंग करके पैसे कमाते है लेकिन उनको पता नहीं होता है की इंट्राडे ट्रेडिंग में कितना टैक्स लगता है तो आज हम आपको कैलकुलेशन के साथ बताने वाले है की इंट्राडे ट्रेडिंग में कितना टैक्स लगता है तो चलो इसके वारे में डिटेल में जानते है
आज के समय में ट्रेडिंग भी कई प्रकार की होती है लेकिन हम खास करके इंट्राडे ट्रेडिंग के वारे में बात करने वाले है की इंट्राडे ट्रेडिंग में कितना टैक्स लगता है क्योकि टैक्स अगर आप सही से नहीं भरते है तो फिर आपको परेशानी हो सकती है
लोग आज के समय में पैसे कमाने के लिए इंटरडे ट्रेडिंग करते है क्योकि इसमें आपको जो भी प्रॉफिट और नुकशान होता है वह सभी एक दिन में ही होता है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इंटरडे ट्रेडिंग करते है
इंट्राडे ट्रेडिंग से हुई कमाई पर टैक्स क्यों लगता है?
इंट्राडे ट्रेडिंग में आप शेयर को एक दिन मे ही खरीद कर उसको बेच देते है जिसकी वजह से आपको जो भी प्रॉफिट होता है आपको हो जाता लेकिन फिर आपको उसमे टैक्स देना पड़ता है लेकिन कितना टैक्स लगता है तो ट्रेडिंग से आप जो भी पैसे कमाते है वो आपकी इनकम में आती है तो यह टैक्स भी इनकम टैक्स के अंदर आता है तो आपको ncome Tax Act, 1961 के तहत टैक्स देना पड़ता है
तो आप जिस भी टैक्स रिसिम के अंदर आते है तो आपको उसके हिसाब से टैक्स को भरना होता है इसके लिए आपको कुछ अलग से टैक्स भरने के जरूरत नहीं होती है
इंट्राडे ट्रेडिंग पर कौन-कौन से टैक्स लगते हैं?
तो इनकम टैक्स के अलावा आपको इसमें कुछ और टैक्स को देना पड़ता है क्योकि इसमेंअगर आपको नुकशान होता है या फिर जब आप शेयर को खरीदते या फिर बेचते है तो आपको इस पर भी कुछ टैक्स देना पड़ता है जैसे
सेक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT)
- यह टैक्स हर खरीद और बिक्री पर लगता है।
- लेकिन इंट्राडे ट्रेडिंग में STT सिर्फ सेल (बिक्री) के समय लगता है।
- यह आपके ब्रोकर (जैसे Zerodha, Groww आदि) द्वारा ऑटोमैटिक काटा जाता है।
STT दर: 0.025% (सेल वैल्यू पर)
उदाहरण:जाइए अगर आप आपने ₹1,00,000 के शेयर को बेचते है तो फिर आपको STT = ₹1,00,000 × 0.025% = ₹25 रूपए देने पड़ते है
ट्रांजैक्शन चार्ज (Exchange Transaction Charges)
यह चार्ज NSE या BSE जैसी स्टॉक एक्सचेंज कंपनियाँ लेती हैं।
- NSE पर: 0.00325%
- BSE पर: 0.003%
GST (Goods and Services Tax
इसके बाद आपको GST भी भरना पड़ता है यह टैक्स आपको ब्रोकर की फीस के ऊपर देना पड़ता है जैसे अगर आपको 100 रूपए ब्रोकरेज के रूप में भरते है तो फिर आपको इस पर GST देना पड़ता है जो 18% है
SEBI Turnover Fees
यह चार्ज Securities and Exchange Board of India (SEBI) द्वारा लिया जाता है जो आपके हर ट्रान्जेक्शन के लिए सुरक्षा प्रदान कराती है यह संस्था ही स्टॉक मार्किट के ऊपर निगरानी रखती है इसकी रेट: 0.0001% (बहुत छोटा चार्ज) होता है जो वहुत कम होता है
Stamp Duty
इसके बार आपको स्टाम्प ड्यूटी भी देना पड़ता है जो राज्य सरकार के द्वारा लिया जाता है जिसकी दर 0.003% से 0.015% के बीच होती है
Income Tax (कमाई पर लगने वाला टैक्स)
इन सब टैक्स के लगने के बाद जब आपका प्रॉफिट होता है तो फिर यह प्रॉफिट आपकी इनकम के रूप में माना जाता है जिसमे आपको अपने इनकम टैक्स के हिसाब से टैक्स को भरना पड़ता है लेकिन अब आपको यह ध्यान रखना होगा की अगर आपको फायदा हो या नुकशान लेकिन जो टैक्स मैंने आपको ऊपर बताये है ये सब टैक्स आपको पहले ही देना पड़ता है लेकिन जो इनकम टैक्स होता है उसको आपको हर साल tax filling करनी पड़ती है
इंट्राडे ट्रेडिंग की इनकम को क्या कहते हैं?
जो भी इनकम आप इंट्राडे ट्रेडिंग करके करते है उसको Speculative Business Income (काल्पनिक व्यवसाय आय) कहा जाता है क्योकि इसमें आप कोई फिजिकल सामान को नहीं खरीदते बेचते है सिर्फ आप जो कीमत का उतर चढ़ाव होता है उस पर ट्रेड करते है
इसलिए इस इनकम का टैक्स Normal Slab Rate के हिसाब से लगता है यानी आपकी बाकी कमाई जैसे (सैलरी, बिजनेस आदि) के साथ जोड़कर लगता है
इंट्राडे ट्रेडिंग में हुए नुकसान का क्या करें?
देखो जैसे अगर आपको ट्रेडिंग में प्रॉफिट होता है तो आपको टैक्स भरना होता है लेकिन अगर आपको नुकशान होता है तो फिर इसका क्या करे तो इसमें एक नियम लगता है जिसकी वजह से आपको टैक्स में छूट मिलती है जैसे अगर अपने इस पूरे वर्ष में जो ट्रेडिंग से कोई भी इनकम नहीं की है सिर्फ आपको लॉस हुआ है तो फिर आपको इसको दिखाना होगा है जिसमे आप Tax Return को लॉस दिखते है
जिसका फायदा यह होता है की आपको जो भी प्रॉफिट अलगे साल होता है तो फिर आप अपने पुराने लॉस से इसको Set Off (Adjust) कर सकते है इससेआपको काफी फायदा होता है लेकिन आप इंट्राडे ट्रेडिंग का लॉस सिर्फ ट्रेडिंग की इनकम में ही set ऑफ कर सकते है ये नहीं की आप उसको other इनकम जैसे सैलरी या रेंट से कर रहे हो आप केवल Speculative Income से ही एडजेस्ट कर सकते है
क्या ऑडिट जरूरी है?
अगर आपकी ट्रेडिंग की इनकम 2 करोड़ से ज्यादा है तो आपको Tax Audit करवाना पड़ता है इसके लिए आपका CA टैक्स बुक को चेक करता है और सरकार को रिपोर्ट करता है
निष्कर्ष (Conclusion)
आज के इस आर्टिकल में हमने आपको इंट्राडे ट्रेडिंग के वारे में डिटेल में बता दिया है की इसमें आपको कितना टैक्स भरना होता है इसमें आप अपने नुकशान को एडजेस्ट भी कर सकते है तो यह काफी अच्छा है इसमें आप अपने और खर्चे भी ऐड कर सकते है जैसे की आपके लैपटॉप का खर्चा और आप wifi जैसे अन्य जो भी डिवाइस use कर रहे है उनको आप एक्सपेंस के रूप में बताकर अपने टैक्स की बचत कर सकते है
इसके अलावा अगर आप ट्रेडिंग से ज्यादा पैसे कमाते है तो फिर आप एक प्रोफेसनल सा एक CA hire कर सकते है टैक्स को भरने के लिए और सारी कैलकुलेशन के लिए जिससे आपको परेशान होने की कोई भी जरूरत नहीं पड़ती है